नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यह दावा करना पूरी तरह से अनुचित होगा कि देश में कोविड-19 के चलते होने वाली सारी मौतें दर्ज नहीं की जा रही हैं। साथ ही, मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा खरीदे जा रहे 60,000 वेंटिलेटर में 96 प्रतिशत स्वदेश निर्मित हैं और इनमें से ज्यादा पीएम केयर्स फंड से वित्त पोषित हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण से होने वाली सारी मौतें दर्ज नहीं किये जाने का दावा महज आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर निकाला गया एक निष्कर्ष है। उन्होंने कहा कि महामारी के शुरूआती चरण में मंत्रालय ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के परामर्श से और मौतें दर्ज किये जाने के तरीकों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के मुताबिक स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किये थे। उन्होंने कहा, ‘‘हमने महामारी के शुरूआती चरण में पाया कि ऐसे कुछ राज्य हैं जो पहले से अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों के कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद मौत होने पर कोविड-19 से मौत के रूप में नहीं दर्ज कर रहे हैं। इसलिए हमनें स्पष्ट किया कि कोई भ्रम की स्थित नहीं रहे और लिखित दिशानिर्देश जारी किये। ’’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा कुछ खास शहरी इलाकों में हुई ज्यादातार मौतें दर्ज की गई, जहां सामान्य दिनों में भी मृत्यु पंजीकृत करने की दर अधिक रहती है। उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में सामान्य समय में (जब वहां कोविड-19 नहीं था) मृत्यु पंजीकरण की दर 93 प्रतिशत है। तमिलनाडु और दिल्ली में सामान्य समय में यह 100 प्रतिशत था। वहीं, राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत है। ’’ उन्होंने कहा कि यह जानना समान रूप से महत्वपूर्ण है कि कुल पंजीकृत मौतों में मेडिकल आधार पर प्रमाणित मौतों का प्रतिशत कितना है। देश में कोविड-19 से मंगलवार तक कुल 38,938 लोगों की मौतें हुई हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने कहा कि 60,000 वेंटिलेटर खरीदे जा रहे हैं जिनमें से 18,000 की राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आपूर्ति की जा चुकी है। भूषण ने प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘इन 60,000 वेंटिलेटर में 50,000 को पीएम केयर्स फंड से वित्त प्रदान किया गया है जो करीब 2,000करोड़ रुपये है। ’’ उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स के तहत और मंत्रालय के बजटीय आवंटन के तहत खरीदे जा रहे वेंटिलेटर में जीपीएस चिप लगे हुए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या एजीवीए ब्रांड के कुछ वेंटिलेटर खारिज कर दिये गये हैं, भूषण ने कहा कि वे वेंटिलेटर सरकार द्वारा खरीदे जा रहे वेंटिलेटर से अलग तरह के थे। भूषण ने कहा कि सोमवार को देश भर में कोरोना वायरस के कुल इलाजरत मामलों के सिर्फ 0.27 प्रतिशत मरीज वेंटिलेटर पर थे। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत बन रहे वेंटिलेटर की कीमत प्रति इकाई डेढ़ लाख से चार लाख रुपये है। जबकि विदेशी वेंटिलेटर की कीमत 10 लाख से 20 लाख रुपये है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रम --भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और आंध्र मेड टेक जोन--देश में वेंटिलेटर निर्माण कार्य कर रहे हैं।
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तो क्या कोरोना से कम मौतें बता रही है सरकार?
Reviewed by IB CITY
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8:47 AM
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