कांग्रेस-NCP को सेना की सरकार बनने का यकीन?

नई दिल्ली महाराष्ट्र में जारी सियासी नाटक में अभी भी शिवसेना के लिए कुछ गुंजाइश बची हुई है। कांग्रेस की सेना के साथ पावर शेयरिंग को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण अपनी कुछ हिचक बनी हुई है। उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ कांग्रेस के वैचारिक विरोध भी रहा है। इसी कारण से सोमवार को राज्यपाल द्वारा दी गई डेडलाइन के बावजूद कांग्रेस से शिवसेना समर्थन पत्र नहीं जुटा सकी। कांग्रेस के विधायक सरकार बनाने को लेकर उत्सुक सोमवार को कांग्रेस वर्किंग कमिटी की 2 मैराथन मीटिंग हुई। पहले सुबह दिल्ली में काफी देर मीटिंग चली और इसके बाद शाम में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के साथ भी सरकार गठन को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के साथ हुई मीटिंग में ज्यादातर विधायकों ने तीन पार्टियों की गठबंधन सरकार में शामिल होने पर सहमति जताई। हाई कमान पर भी विधायकों के दबाव और जल्दी फैसला नहीं लेने की सूरत में कुछ विधायकों के टूटने का डर बना हुआ है। पढे़ं : शिवसेना के हिंदुत्व बैकग्राउंड से कांग्रेस के कुछ नेता चिंतित सूत्रों का कहना है कि शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने से जुड़े सभी पहलू पर चर्चा की गई। कुछ नेताओं ने इस गठबंधन का असर महाराष्ट्र के बाहर पड़ सकता है, इस पर भी अपना पक्ष रखा। कुछ केरल से ताल्लुक रखनेवाले नेताओं ने कहा कि शिवसेना के उग्र हिंदुत्ववादी छवि के साथ जाने पर पार्टी को कुछ राज्यों खास तौर पर केरल में नुकसान हो सकता है। मंत्रालयों को लेकर भी पहले ही स्पष्टता पर अड़ी कांग्रेस कांग्रेस की मैराथन मीटिंग में यह भी कहा गया कि सरकार बनाने की स्थिति में पावर-शेयरिंग और मंत्रालयों के बंटवारे पर पहले ही सहमति बन जानी चाहिए। सत्ता में भागीदारी और मंत्रालयों को लेकर पहले ही समझौते की चर्चा के कारण भी पत्र देने में देरी हो गई। हालांकि, समर्थन पत्र नहीं मिलने के कारण महाराष्ट्र में सियासी सस्पेंस और बढ़ गया है। सोमवार को शिवसेना सांसद अरविंद सावंत के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद माना जा रहा था कि सरकार बनाने को लेकर अनौपचारिक सहमति बन गई है। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद औपचारिक तौर पर समर्थन का ऐलान भी कर दिया जाएगा। पढे़ं : कार्यसमिति की बैठक के बाद कांग्रेस ने जारी किया बयान कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने एक बयान भी जारी किया। वेणुगोपाल के बयान के अनुसार, 'कांग्रेस कार्यसमिति की हुई बैठक में महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से बात भी की। पार्टी एनसीपी के साथ इस मुद्दे पर आगे और चर्चा करेगी।' पढ़ें : कांग्रेस-एनसीपी दोनों मंत्रालय बंटवारे पर चाहते हैं स्पष्टता सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शरद पवार से समर्थन को लेकर विस्तृत चर्चा की। दोनों ही नेता इस बात पर राजी हैं कि सरकार गठन से पहले ही पावर-शेयरिंग को लेकर आपसी सहमति बन जानी चाहिए। इसके साथ ही हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता को लेकर भी सेना के साथ कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत समझौते की बात पर सहमति बननी चाहिए। कांग्रेस कार्यसमिति ने आगे एनसीपी के साथ चर्चा के लिए अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल को नियुक्त किया है। पढ़ें : NCP सरकार बनाने को लेकर बहुत अधिक उत्सुक नहीं सूत्रों का कहना है कि शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़ी हुई है और ऐसे हालात में एनसीपी सरकार बनाने को लेकर बहुत उत्सुक नहीं है। एनसीपी को सरकार गठन के लिए अनिवार्य तौर पर उसे सेना से समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे हालात में एनसीपी आगे बढ़कर सरकार को लीड करने के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस को यकीन, राष्ट्रपति शासन की स्थिति नहीं बनेगी किसी भी पार्टी द्वारा बहुमत साबित नहीं कर सकने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू करने की भी आशंका है। ऐसी सूरत में राज्यपाल विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि ऐसी स्थिति नहीं बनेगी क्योंकि 160 विधायकों का समर्थन सरकार बनाने के लिए किसी भी परिस्थिति में मिल जाएगा।


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