राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा: तृणमूल, NCP ने मांगा मौका

नई दिल्ली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (), और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने सोमवार को चुनाव आयोग से ‘राष्ट्रीय दल’ का उनका दर्जा बरकरार रखने का अनुरोध करते हुए कहा है कि उन्हें आगामी चुनावों में प्रदर्शन बेहतर करने का एक मौका दिया जाना चाहिए। आयोग ने पिछले लोकसभा चुनाव में इन दलों का प्रदर्शन राष्ट्रीय दल की मान्यता के अनुरूप नहीं रहने का हवाला देते हुए इन्हें नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न इनका राष्ट्रीय दल का दर्जा खत्म कर दिया जाए। तीनों दलों ने आयोग के सामने पेश अपने जवाब में दलील दी है कि पुराने राजनीतिक दल होने के साथ-साथ, राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रमुख योगदान रहा है। इसलिए राष्ट्रीय दल के रूप में उनकी मान्यता का आकलन पिछले चुनावी प्रदर्शन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा, 'हमने अपने जवाब में आयोग से कहा है हमारी पार्टी कांग्रेस के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी है और स्वतंत्रता आंदोलन में भी उसकी अग्रणी भूमिका रही। हमने लोकसभा में सीपीआई के मुख्य विपक्षी दल (पूर्व में) होने का भी हवाला देते हुए पार्टी का राष्ट्रीय दल का दर्जा बहाल रखने का आयोग से अनुरोध किया है।' 2024 तक रहे दर्जा: तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने अपने जवाब में कहा कि हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में सीपीआई का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा लेकिन विभिन्न राज्यों में वामदल की सरकार रहने और संविधान को मजबूत बनाने में पार्टी की अहम भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस ने दलील दी है कि उसे 2014 में राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया गया था और इसे कम से कम 2024 तक जारी रखा जाना चाहिए। 10 सीटें जीतकर बची बीएसपीगौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई और एनसीपी के अलावा बीएसीप के ऊपर भी राष्ट्रीय दल का दर्जा समाप्त होने की तलवार लटक रही थी, लेकिन लोकसभा की दस और कुछ विधानसभा सीटें जीतने के कारण वह इस संकट से फिलहाल बच गई है। एनसीपी की दलीलएनसीपी के वरिष्ठ नेता माजिद मेमन ने कहा कि उनकी पार्टी 15 साल तक महाराष्ट्र में सत्ता में थी। साथ ही अपवादस्वरूप एनसीपी एकमात्र दल है जिसे उसकी स्थापना के समय से ही राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला हुआ है क्योंकि पार्टी बनने के तुरंत बाद हुए चुनाव में उसका प्रदर्शन राष्ट्रीय दल का दर्जा पाने के मानकों के अनुरूप रहा। ये हैं नियमचुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के तहत किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा तब मिलता है जब उसके उम्मीदवार लोकसभा चुनाव में कम से कम छह प्रतिशत मत प्राप्त करें या उसके चार सदस्य चुने जाएं या विधानसभा चुनावों में कम से कम चार या इससे अधिक राज्यों में छह प्रतिशत मत प्राप्त हों। उल्लेखनीय है कि इन मानकों के तहत कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी, सीपीआई, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी ऑफ मेघालय को राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त है।


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